महाराष्ट्र में लाड़ली बहना योजना (जिसे मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना भी कहा जाता है) को अभी बड़ा झटका लगा है। राज्य चुनाव आयोग ने जनवरी 2026 की किस्त को एडवांस में देने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह फैसला नगर निगम चुनावों के कारण लागू आदर्श आचार संहिता की वजह से आया है। इस रोक से राज्य की एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं प्रभावित हुई हैं, जो हर महीने इस योजना से आर्थिक मदद पाती हैं।
सरकार ने पहले मकर संक्रांति के मौके पर बड़ा ऐलान किया था। उसमें कहा गया था कि दिसंबर और जनवरी दोनों महीनों की किस्त एक साथ महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। यानी लाभार्थी महिलाओं को एक साथ 3000 रुपये मिलने वाले थे। सरकार का कहना था कि त्योहार के समय यह अतिरिक्त मदद महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होगी। लेकिन इस घोषणा के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया।
विपक्ष ने क्यों की शिकायत
कांग्रेस पार्टी ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया। महाराष्ट्र कांग्रेस के एक बड़े नेता ने राज्य चुनाव आयोग को लिखित शिकायत भेजी। शिकायत में साफ कहा गया कि मतदान से सिर्फ एक दिन पहले इतनी बड़ी रकम महिलाओं के खातों में डालना सही नहीं है। विपक्ष का आरोप था कि यह मतदाताओं को लुभाने की कोशिश है। कांग्रेस ने इसे सामूहिक सरकारी रिश्वतखोरी जैसा बताया और तुरंत रोक लगाने की मांग की।
यह मुद्दा इसलिए भी ज्यादा गर्म हो गया क्योंकि महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में 15 जनवरी को मतदान होना था। ऐसे में चुनावी माहौल में यह योजना काफी संवेदनशील बन गई थी।
चुनाव आयोग ने क्या जांच की और फैसला सुनाया
कांग्रेस की शिकायत मिलने के बाद राज्य चुनाव आयोग ने पूरे मामले को बहुत गंभीरता से लिया। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव से पूरी रिपोर्ट मंगवाई। मुख्य सचिव ने सफाई दी कि लाड़ली बहना योजना एक लगातार चलने वाली योजना है। उन्होंने इसे संजय गांधी निराधार योजना जैसी अन्य योजनाओं से जोड़ा, जिन्हें चुनाव के समय भी जारी रखने की इजाजत मिलती है।
लेकिन चुनाव आयोग इस तर्क से पूरी तरह राजी नहीं हुआ। आयोग ने सभी बातों को ध्यान में रखकर अपना अंतिम फैसला सुनाया। आयोग ने स्पष्ट कहा कि दिसंबर की नियमित किस्त यानी 1500 रुपये महिलाओं को दिए जा सकते हैं। लेकिन जनवरी की किस्त को एडवांस में ट्रांसफर करने की कोई अनुमति नहीं है।
आयोग ने यह भी साफ किया कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान योजना में कोई नया लाभार्थी नहीं जोड़ा जा सकता और न ही कोई अतिरिक्त लाभ दिया जा सकता है। इस फैसले के बाद सरकार 14 जनवरी से पहले जनवरी की रकम नहीं भेज सकी। इससे लाखों महिलाओं को काफी निराशा हुई।
मध्य प्रदेश में भी योजना से जुड़ी परेशानी
महाराष्ट्र की तरह मध्य प्रदेश में भी लाड़ली बहना योजना को लेकर कुछ दिक्कतें सामने आई हैं। बुरहानपुर जिले में सात हजार से ज्यादा महिलाओं के नाम योजना की सूची से हटा दिए गए हैं। नए साल में कई महिलाओं को बाहर कर दिया गया। इनमें ज्यादातर 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं हैं, जो योजना की आयु सीमा पार कर चुकी हैं।
कुछ महिलाओं के नाम समग्र आईडी में गलती या डिलीट होने की वजह से भी हटाए गए। इस कार्रवाई से प्रदेश की तीन हजार से ज्यादा महिलाएं सीधे प्रभावित हुई हैं।
मध्य प्रदेश में 32वीं किस्त का इंतजार
मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना से जुड़ी सवा करोड़ से ज्यादा महिलाएं अब अगली किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। यह योजना की 32वीं किस्त होगी। योजना के तहत हर महीने 1500 रुपये की मदद दी जाती है। महिलाएं इस पैसे से घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरतें पूरी करती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह किस्त मकर संक्रांति या 15 जनवरी के आसपास खातों में आ सकती है। लेकिन अभी तक राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। महिलाएं सरकार से जल्द स्पष्ट जानकारी की उम्मीद कर रही हैं।
योजना महिलाओं के लिए क्यों इतनी अहम
दोनों राज्यों में चल रही ये योजनाएं महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के कई परिवारों में यह रकम महीने के जरूरी खर्चों को पूरा करने में मदद करती है। महिलाएं इस पैसे से बच्चों की स्कूल फीस, दवाइयां और घर की छोटी-मोटी जरूरतें पूरी करती हैं।
कई महिलाएं इस राशि को बचाकर छोटे-मोटे निवेश भी करती हैं। इसलिए योजना में किसी भी तरह की देरी या रुकावट से उन्हें बहुत परेशानी होती है। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और परिवार में उनकी भूमिका को मजबूत करने का एक बड़ा जरिया बन गई है।
आगे क्या होगा
महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव खत्म होने के बाद आचार संहिता हट जाएगी। उसके बाद जनवरी की बाकी किस्त जारी की जा सकेगी। सरकार को भरोसा है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में सरकार जल्द ही 32वीं किस्त की तारीख बताएगी।
दोनों राज्यों की महिलाएं अपनी-अपनी किस्त का इंतजार कर रही हैं। यह पूरा मामला दिखाता है कि लोककल्याणकारी योजनाओं को चुनाव के समय क्या-क्या चुनौतियां झेलनी पड़ती हैं। साथ ही यह भी साफ होता है कि चुनाव आयोग अपने नियमों पर कितना सख्त है और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करता।
यह फैसला और अपडेट महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये योजनाएं उनकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हैं। सरकार और आयोग के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है ताकि महिलाओं को समय पर मदद मिल सके।
निष्कर्ष महाराष्ट्र में राज्य चुनाव आयोग ने लाड़ली बहना योजना की जनवरी 2026 किस्त को एडवांस में देने पर रोक लगा दी, जिससे एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं प्रभावित हुईं। यह रोक आदर्श आचार संहिता और नगर निगम चुनावों (15 जनवरी) के कारण लगी। दिसंबर की नियमित किस्त दी जा सकती है, लेकिन जनवरी की नहीं। मध्य प्रदेश में भी कुछ महिलाओं के नाम हटाए गए, जबकि सवा करोड़ महिलाएं 32वीं किस्त का इंतजार कर रही हैं। यह मामला दिखाता है कि चुनावी समय में ऐसी योजनाओं को सख्त नियमों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को अब चुनाव बाद या आधिकारिक घोषणा के बाद मदद मिलने की उम्मीद है।