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दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किसके पास? RBI की तेज खरीदारी से भारत टॉप-5 में पहुंचा, चीन-रूस को पीछे छोड़ने की तैयारी

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहे हैं। यह सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा का बड़ा सवाल बन चुका है। हाल के आंकड़ों में भारत का नाम भी तेजी से ऊपर आ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने पिछले कुछ सालों में जबरदस्त तरीके से सोना जमा किया है। लेटेस्ट वर्ल्ड गोल्ड रैंकिंग में भारत अब टॉप देशों की सूची में मजबूती से जगह बना चुका है।

कई लोग सोचते हैं कि भारत में इतना सोना आता-जाता रहता है, लेकिन केंद्रीय बैंक के पास कितना है, यह कम ही लोग जानते हैं। नई रैंकिंग देखकर हैरानी होती है कि भारत अब कहां खड़ा है। आइए जानते हैं पूरी लेटेस्ट जानकारी, जो सीधे आंकड़ों पर आधारित है।

सोने का भंडार क्या होता है और क्यों इतना महत्वपूर्ण

किसी देश का सोने का भंडार वो सोना होता है जो उसका केंद्रीय बैंक या सरकार सुरक्षित जगह पर रखती है। यह सोना ज्वेलरी या सजावट के लिए नहीं होता। यह आर्थिक संकट के समय में काम आता है। जब मुद्रा कमजोर होती है, विदेशी भुगतान करने की जरूरत पड़ती है या बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव आते हैं, तो यह सोने का भंडार स्थिरता देता है।

यह देश की मुद्रा पर लोगों का भरोसा बढ़ाता है और जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होता है। आज के समय में जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं, केंद्रीय बैंक इस भंडार को और मजबूत करने में लगे हैं।

दुनिया के टॉप देशों के पास कितना सोना है – लेटेस्ट रैंकिंग

दुनिया में सबसे ज्यादा सोने का भंडार रखने वाले देशों की सूची में अमेरिका अभी भी सबसे आगे है। उसके बाद यूरोपीय देशों का दबदबा है। लेकिन एशिया में भारत और चीन की तेजी से प्रगति हो रही है।

रैंकदेशसोने का भंडार (टन में)
1अमेरिका8133
2जर्मनी3352
3इटली2452
4फ्रांस2437
5रूस2333
6चीन2262
7स्विट्जरलैंडलगभग 1000+
8जापानलगभग 800-900
9भारत822

यह आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका का भंडार सबसे बड़ा है, जो 8000 टन से ऊपर है। यूरोप के देशों ने भी लंबे समय से मजबूत भंडार बनाए रखा है। लेकिन भारत अब 822 टन के साथ टॉप-10 में मजबूती से है और आगे बढ़ने की राह पर है।

हाल के सालों में केंद्रीय बैंकों की तेज खरीदारी

पिछले कुछ सालों से केंद्रीय बैंक बहुत तेजी से सोना खरीद रहे हैं। खासकर 2022 और 2023 में रिकॉर्ड स्तर पर खरीदारी हुई। उस दौरान एक साल में 1000 टन से ज्यादा सोना बाजार से उठाया गया।

रूस ने पश्चिमी देशों के दबाव के बाद डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोना बढ़ाया। चीन ने भी लगातार कई महीनों तक अपने भंडार में इजाफा किया। तुर्की, पोलैंड, कजाकिस्तान और कतर जैसे देश भी भू-राजनीतिक जोखिम से बचने के लिए आगे आए। पूर्व सोवियत देशों ने भी इस दौड़ में बढ़त ली।

अब सोना सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक ढाल के रूप में देखा जा रहा है।

सोने की कीमतें क्यों इतनी ऊंची चल रही हैं

सोने की कीमतें इस समय रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। इसके पीछे कई वजहें हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में तनाव और ताइवान को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को डराया है। ऐसे में लोग सुरक्षित जगह तलाशते हैं और सोना सबसे अच्छा विकल्प लगता है।

मुद्रास्फीति का डर और आर्थिक मंदी की आशंका भी कीमतें बढ़ा रही है। कागजी संपत्तियां जोखिम भरी लग रही हैं। साथ ही केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी से बाजार में सोने की कमी हो गई है। सप्लाई कम होने से दाम और चढ़ गए। कई देश डॉलर पर कम निर्भर होना चाहते हैं, जिससे भी सोने की मांग बढ़ी है।

भारत का सोने का भंडार और चुनौतियां

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना खरीदने वाला देश है। यहां शादियां, त्योहार और परंपराओं में सोना बहुत इस्तेमाल होता है। लेकिन केंद्रीय बैंक के पास रखा सोने का भंडार कुल विदेशी मुद्रा रिजर्व का छोटा हिस्सा है।

देश की बड़ी आबादी और सोने की भारी खपत को देखते हुए यह भंडार अभी और बढ़ाने की जरूरत है। आयात बिल बढ़ता जाता है और रुपया दबाव में आता है। इसलिए सरकार गोल्ड बॉन्ड, ईटीएफ और हॉलमार्किंग जैसे कदम उठा रही है। लोग भौतिक सोने की बजाय डिजिटल या बॉन्ड में निवेश करें, यह कोशिश है। हाल में RBI की खरीदारी तेज हुई है, लेकिन रणनीति सावधानी से चल रही है।

क्या हुआ, क्यों मायने रखता है और आगे क्या समझें

लेटेस्ट रैंकिंग में भारत के पास 822 टन सोने का भंडार है। RBI ने तेज खरीदारी से चीन और रूस को पीछे छोड़ने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं। दुनिया में अमेरिका सबसे आगे है, उसके बाद यूरोपीय देश और फिर रूस-चीन आते हैं।

यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सोने का भंडार देश की आर्थिक ताकत और संकट में सुरक्षा देता है। भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति के समय में यह और भी जरूरी हो जाता है।

आगे के लिए समझना जरूरी है कि केंद्रीय बैंक इस दौड़ में लगे रहेंगे। भारत को भी अपने भंडार को और बढ़ाना होगा। स्थानीय रीसाइक्लिंग, डिजिटल विकल्प और सावधानी भरी खरीदारी से यह संभव है। सोना अब सिर्फ गहना नहीं, बल्कि आर्थिक ढाल बन चुका है।

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